लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण के इंजीनियर और बाबू की मिलीभगत से कोई भी अवैध बिल्डिंग वर्षों आराम से रह सकती है, वह भी तब जब कि विहित प्राधिकारी ने उसको गिराने के आदेश कर रखे हो। ताजा मामला अर्जुनगंज ग्राम-सरसंवा जी.आर.एस मेमोरियल स्कूल एवं जनरल हॉस्पिटल के सामने बने हाउसिंग अपार्टमेंट का है, जिसके बिल्डर राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय व अन्य के खिलाफ लखनऊ विकास प्राधिकरण ने 03 फरवरी 2023 को वाद संख्या-117/2022 बनाम धारा-28क (1) उ०प्र० नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973 के अन्तर्गत किया। प्रस्तुत वाद प्रवर्तन जोन द्वारा अनाधिकृत निर्माण के सम्बन्ध में प्रस्तुत की गयी चालानी आख्या 07 मार्च 2022 के आधार पर वाद संख्या-117/2022 15 मार्च 2022 पंजीकृत करते हुए राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय व अन्य, ने जी०आर०एस० मेमोरियल स्कूल एवं जनरल हॉस्पिटल के सामने, ग्राम सरसंवा, अर्जुनगंज, लखनऊ के विरूद्ध उ०प्र० नगर योजना एवं विकास अधिनियम-1973 की धारा-27(1) व 28 (1) के परन्तुक के अधीन कारण बताओ नोटिस 15 मार्च 2022 को जारी की कि लगभग 14,000.00 वर्गफिट क्षेत्रफल में पूर्व निर्मित भूतल के ऊपर प्रथम तल पर निर्माण कार्य किया जा रहा है। स्थल पर कोई स्वीकृत मानचित्र नही दिखाया गया। बिल्डिंग में जीरो सेटबैक है और अवैध रूप से चौथा और पांचवा मंजिल भी बनाया गया था। सूत्र बताते हैं कि पूर्व उपाध्यक्ष इंद्रमणि त्रिपाठी के कार्यकाल के दौरान सानवी ग्रेसिया की इस अवैध बिल्डिंग को और तेज गति मिली थी।
कारण बताओ नोटिस विपक्षी के प्रतिनिधि पर तामील करायी गयी, जैसा कि नोटिस सर्वर द्वारा नोटिस पर आख्या अंकित की गयी है। नोटिस तामीली उपरान्त विपक्षी द्वारा नियत तिथि पर उपस्थित होकर प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किया कि स्वीकृत मानचित्र परमिट संख्या-20180630192718620 26 जून 2019 के अनुसार निर्माण कराया जा रहा है। विपक्षी के प्रार्थना-पत्र पर प्रवर्तन जोन ने 11जनवरी 2023 को पुलिस कार्यवाही की संस्तुति प्रस्तुत की गयी, जिस आधार पर धारा-28 (2) के अन्तर्गत पुलिस कार्यवाही का पत्र जारी किया। इसके बावजूद भी स्थल पर निर्माण कार्य न रोके जाने के कारण प्रवर्तन जोन द्वारा सील संस्तुति आख्या 03 फ़रवरी 2023 मय फोटोग्राफ प्रस्तुत की कि पुलिस कार्रवाई के पश्चात भी निर्माणकर्ता द्वारा स्थल पर अनवरत रूप से निर्माण किया जा रहा है, जिसके दृष्टिगत उक्त निर्माण को सील किया जाना अतिआवश्यक है।
प्रवर्तन जोन की उपरोक्त आख्या के आलोक में अनाधिकृत निर्माण / उपयोग/अध्यासन को रोकने के उद्देश्य से लोकहित में उपरोक्त अधिनियम 1973 तथा संशोधित अधिनियम 1997 की धारा 28क (1) के अन्तर्गत अनाधिकृत निर्माण एवं उससे सम्बद्ध समस्त सुविधाओं को सील किया जाना आवश्यक है। विहित प्राधिकारी, लखनऊ विकास प्राधिकरण प्रश्नगत निर्माण/विकास कार्य एवं उससे सम्बद्ध समस्त सुविधाओं को उ०प्र० नगर योजना एवं विकास अधिनियम-1973 यथा संशोधित अधिनियम-1997 की धारा-28 क (1) के अन्तर्गत सहायक अभियन्ता प्रवर्तन जोन-1 को परिसर सील करने के लिए अधिकृत किया।
सहायक अभियन्ता प्रवर्तन जोन-1 सम्बन्धित निर्माण एवं उससे सम्बद्ध सुविधाओं को सील करते हुए परिसर की निगरानी हेतु थानाध्यक्ष को पत्र प्रेषित करें तथा निर्माण स्थल पर अवैध निर्माण को सील करने की टिप्पणी लाल पेंट से अंकित करवाई जाये एवं अन्य आवश्यक सामग्री के साथ अवैध निर्माण स्थल को सील किया जाये। अनुपालन आख्या 10 फरवरी 23 तक प्रस्तुत करें। इसके बाद भी अभी तक बिल्डिंग को गिराया नहीं जा सका है।
अवैध बिल्डिंग को भी निर्बाध बिजली देते हैं इंजीनियर
लखनऊ। विद्युत विभाग के इंजीनियर घूसखोरी करके अवैध बिल्डिंग सानवी ग्रेसिया को भी निर्बाध बिजली देते हैं। अर्जुनगंज की बिल्डिंग सानवी ग्रेसिया के मामले में भी अधिशासी अभियन्ता, विद्युत नगरीय वितरण खण्ड-लखनऊ को इस आशय से पत्र भेजा गया था कि अवैध निर्माण स्थल पर विद्युत संयोजन न दिया जाये, यदि दे दिया गया है तो विद्युत विच्छेदन कर दिया जाये। मजेदार बात यह है कि अगर अवैध बिल्डिंग के फ्लैट में बिजली कनेक्शन न दिया गया होता तो शुरुआत में ही ग्राहक ऐसे अवैध बिल्डिंग के फ्लैट को लेने से मना कर देते, लेकिन उस समय तो बाकायदा घूस मिल रहे थे और धड़ाधड़ कनेक्शन दिए जा रहे थे। कागजों में इसे टेंपरेरी कनेक्शन दिखाया गया था लेकिन ग्राहकों से बताया गया था कि इसी आधार पर सारे कनेक्शन किए जाते हैं, ऐसे में ग्राहक बेवकूफ बन गए और मोटी रकम विद्युत इंजीनियरों को दे बैठे।
जवाबदेह इंजीनियर हो गए रिटायर तो कई दूसरे जिले में
लखनऊ। अर्जुनगंज स्थित जय गुरुदेव आश्रम के सामने सानवी ग्रेसिया को बनाने वाले मालिक राजेंद्र पांडे इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि लाखों रुपए इंजीनियरों को घूस देने के बाद अब उनके अवैध बिल्डिंग के टूटने की बारी है। इस बिल्डिंग के शुरुआत के समय से लेकर अब तक के बीच करीब एक दर्जन इंजीनियरों ने बिल्डर को जमकर दूहा, बताया जाता है कि दूहने वाले इंजीनियरों में भरत पांडे, विपिन बिहारी राय, राहुल विश्वकर्मा, इम्तियाज, के साथ ही सुभाष शर्मा रिटायर हो गए शामिल हैं। इस अवैध बिल्डिंग में फिलहाल अभी 25 परिवार रह रहे हैं, और इनमें से अधिकतर लखनऊ विकास प्राधिकरण की जनता अदालत में जाकर शिकायत भी कर चुके हैं कि उनका पैसा वापस दिलाया जाए लेकिन लखनऊ विकास प्राधिकरण कोई मेकैनिज्म नहीं डेवलप कर पा रहा है कि उनके इंजीनियरों की मनमानी और लापरवाही की वजह से जो गरीब ग्राहक फंस गए हैं, उनके पैसे वापस लाने के लिए क्या कार्रवाई की जाएगी? उनके पास सिर्फ एक जवाब होता है कि कोर्ट जाइए। लखनऊ विकास प्राधिकरण के इंजीनियरों की मनमानी का आलम यह था कि पांचवें फ्लोर का नक्शा कुछ है ही नहीं, इसके बावजूद पांचवे फ्लोर पर 10 फ्लैट अलग से बना दिए गए। बताया तो यह भी जाता है कि इन फ्लैट को इंजीनियरों के ही रिश्तेदारों के नाम पर रजिस्ट्री की गई है।